D.EL.ED.
PART-1
CPS-01 NEPALI LANGUAGE
SYLLABUS
UNIT 1: पाठ्यपुस्तक जानकारी
- प्रथम श्रेणीदेखि आठौं
श्रेणीसम्म पश्चिम बंगाल प्राथमिक शिक्षा पर्षद अनि पश्चिम बंगाल माध्यमिक
शिक्षा परिषद्द्वारा निर्देशित पाठ्यपुस्तकहरूको पर्याप्त अनि विस्तृत
जानकारी।
UNIT 2: मातृभाषा शिक्षण
- मातृभाषाको परिभाषा अनि
महत्व।
- मातृभाषा शिक्षणको लक्ष्य, उद्देश्य अनि प्रयोजनियता।
- प्रारम्भिक स्तरमा शिक्षाको
माध्यम मातृभाषा – विभिन्न मतहरू।
UNIT 3: भाषा संरचना अनि शिक्षण समस्या
- भाषाको परिभाषा, भाषाको बुद्ध रूप, कथित भाषा र लिखित भाषा।
- लिखित भाषाको रूपमा पद्य, म गय भाषा, बोलचालको भाषा र साहित्यिक
भाषा।
- शुद्ध भाषा बोल्ने अनि लेख्ने
दक्षता अर्जन विधि।
- लिपि – नेपाली भाषामा प्रचलित
देवनागरी अनि नन्दी नागरी लिपि।
- नेपाली भाषा शिक्षणमा देखा
परेका विभिन्न कठिनाइहरू – कारण अनि निवारणका उपायहरू।
UNIT 4: भाषा र मानसिक-सामाजिक विकास
- प्रथम भाषा (मातृभाषा), द्वितीय भाषा अनि आदान-प्रदानको
भाषा।
- आदान-प्रदान अनि चिन्तनको
रूपमा भाषा।
- श्रेणी कक्षामा भाषाद्वारा
बौद्धिक विकास।
- समाजसित भाषाको सम्बन्ध।
- पूर्व बाल्यावस्था अनि
पाल्यावस्थामा भाषा सिकाइ प्रक्रिया।
- भाषासम्बन्धी दक्षता, कर्तव्य अनि उत्तरदायित्व।
UNIT 5: भाषा शिक्षणका विभिन्न स्तर अनि दक्षता विकास
- श्रवण (अपणसुनाई) को महत्व, आंशिक अनि एकाग्र सुनाईका
विधि।
- श्रवण कक्षामा प्रयोग – बाल
गीत, बाल कविता, लघु कथा, रेडियो, टीभी, आलोचना, संवाद, खेलकूद, इत्यादि।
- कथन/बोलाई अभ्यास – लघुकथा, बालगीत, आवृत्ति, बातचीत अभ्यास।
- पठन – आदर्श पठन, सस्वर पठन, मौन पठन, व्यक्तिगत पठन, सामूहिक पठन, सूचना आधारित पठन सामग्री।
- लेखन – अनुलेखन, प्रतिलेखन, श्रुतिलेखन, सृजनात्मक लेखन, सुन्दर हस्तलिपि अभ्यास।
- हिज्जे प्रणाली – शुद्ध लेखन, हिज्जे भूलका कारण र निवारण
उपाय।
- शब्द भण्डार निर्माण – अर्थ
सहित प्रयोग, शब्दकोश, विश्वकोश, इन्टरनेट, पत्रिका, साहित्य।
UNIT 6: नेपाली भाषा शिक्षण पद्धति
- सरकारद्वारा अनुमोदित
पाठ्यपुस्तकहरूको समालोचनात्मक प्रस्तुतिकरण (कक्षा 1–8)।
- वर्णकनिक, शब्दकनिक, वाक्यकनिक पद्धति।
- बालगीत, अनुकरण- अभिनय पद्धति, प्रकल्प पद्धति, अनुबन्ध पद्धति, आलोचनात्मक पद्धति।
- पाठ्यपुस्तक बाहिरका स्रोत –
समाचार पत्र, लोककथा, शिशु साहित्य आदि।
UNIT 7: व्याकरण शिक्षण कार्यगत
- व्याकरण शिक्षणको लक्ष्य, उद्देश्य अनि प्रयोजनियता।
- व्याकरण शिक्षण पद्धतिहरू –
आगमन, निगमन, सूत्र पद्धति।
- कार्यगत अभ्यास – निर्देशित
पाठ्यसूची अनुसार।
- पर्यायवाची, विपरीतार्थक, अनेकार्थक, भिन्नार्थ शब्दहरूको प्रयोग।
- लेखन अभ्यास – पत्र लेखन, निबन्ध, आवेदन, प्रतिवेदन, अनुच्छेद, भाव संक्षेप/विस्तार।
UNIT 8: भाषा शिक्षण सहायक उपकरणहरू
- भाषा शिक्षण सिकाइ उपकरणहरूको
आवश्यकता र महत्व।
- कम मूल्य तथा विनामूल्य
उपकरणहरूको तयारी अनि प्रयोग।
- दृश्य उपकरण – चार्ट, नक्सा, पाकेट बोर्ड, फ्लैश कार्ड, ब्ल्याकबोर्ड।
- श्रव्यदृश्य उपकरण – सिडी, रेडियो, टेलिभिजन, प्रोजेक्टर, पावरप्वाइण्ट प्रस्तुति।
UNIT 9: पाठ परिकल्पना अनि पाठ योजना निर्माण
- पाठ परिकल्पना: उद्देश्य, महत्व अनि आवश्यकता।
- अणु तथा बृहत पाठ योजना तयानी
अनि गठन अभ्यास।
- मूल्यांकनका लागि वर्कसीट तथा
प्रश्नपत्र निर्माण।
- क्रियाकलाप (Activity) आधारित मूल्यांकन।
UNIT 10: मूल्यांकन प्रणाली र उपकरणहरू
- भाषा शिक्षणमा मुल्यांकनका
सिद्धान्त र विधिहरू।
- साक्षात्कार, कथा, संवाद, गद्य/पद्य पठनद्वारा
मूल्यांकन।
- हिज्जे अनि उच्चारण आधारित मूल्यांकन।
- आन्तरिक तथा बाह्य मूल्यांकन।
- प्रगति जाँच पत्र (Achievement Test) तयार गर्ने प्रक्रिया।
- ब्लूप्रिन्ट, एकाई जाँचपत्र अनि कक्षा
आधारित प्रश्नपत्र निर्माण।
CPS-01 NEPALI LANGUAGE
STUDY NOTES
UNIT -2
मातृभाषा
शिक्षण
मातृभाषा
की परिभाषा और महत्व
परिभाषा:
मातृभाषा वह भाषा है जिसे
व्यक्ति अपने परिवार और समाज से सबसे पहले सीखता है। यह भाषा व्यक्ति की पहचान, संस्कृति, और
भावनाओं का अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। मातृभाषा का ज्ञान व्यक्ति को अपने परिवेश
से जोड़ता है और उसे अपनी सांस्कृतिक धरोहर को समझने में मदद करता है।
महत्व:
- संस्कृति का संरक्षण: मातृभाषा व्यक्ति की संस्कृति और
परंपराओं का अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। यह भाषा व्यक्ति को अपनी
सांस्कृतिक पहचान को समझने और संरक्षित करने में मदद करती है।
- भावनात्मक विकास: मातृभाषा में संवाद करने से
व्यक्ति अपनी भावनाओं को बेहतर तरीके से व्यक्त कर सकता है। यह आत्मविश्वास
और सामाजिक कौशल को बढ़ावा देती है।
- शिक्षा में सहायक: मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने
से छात्रों की समझ और ज्ञान में वृद्धि होती है। यह अन्य विषयों को समझने में
भी मदद करती है।
- सामाजिक संबंध: मातृभाषा का ज्ञान व्यक्ति को
अपने समुदाय के साथ बेहतर संबंध स्थापित करने में मदद करता है। यह संवाद और
सहयोग को बढ़ावा देती है।
मातृभाषा
शिक्षण का लक्ष्य, उद्देश्य और प्रयोजनियता
लक्ष्य:
मातृभाषा शिक्षण का मुख्य
लक्ष्य छात्रों को उनकी मातृभाषा में दक्षता प्रदान करना है। यह उन्हें भाषा के
सही उपयोग, उच्चारण,
और व्याकरण के नियमों को
समझने में मदद करता है।
उद्देश्य:
- भाषाई दक्षता: छात्रों को मातृभाषा में बोलने, पढ़ने, और लिखने की क्षमता विकसित करना।
- संस्कृति का ज्ञान: छात्रों को उनकी सांस्कृतिक धरोहर
और परंपराओं के बारे में जानकारी देना।
- सामाजिक कौशल का
विकास: छात्रों में संवाद
कौशल और सामाजिक संबंधों को मजबूत करना।
- शैक्षणिक सफलता: मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने
से छात्रों की शैक्षणिक सफलता में वृद्धि करना।
प्रयोजनियता:
मातृभाषा शिक्षण का
उद्देश्य न केवल भाषा कौशल को विकसित करना है,
बल्कि यह छात्रों के समग्र
विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह उन्हें आत्म-विश्वास, सामाजिक
जिम्मेदारी, और नैतिक मूल्यों को समझने में मदद करता है।
प्रारम्भिक
स्तर में शिक्षा का माध्यम मातृभाषा – विभिन्न मत
प्रारम्भिक स्तर पर
मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने के विभिन्न मत हैं:
- समर्थक दृष्टिकोण:
- कई शिक्षाविद् मानते
हैं कि प्रारम्भिक शिक्षा में मातृभाषा का उपयोग बच्चों की समझ और सीखने की
क्षमता को बढ़ाता है। यह उन्हें अपने विचारों को स्पष्टता से व्यक्त करने
में मदद करता है।
- मातृभाषा में शिक्षा
से बच्चे अपनी संस्कृति और परंपराओं को समझते हैं, जिससे उनका सामाजिक और भावनात्मक
विकास होता है।
- विपक्षी दृष्टिकोण:
- कुछ शिक्षाविद् का
मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा सीमित हो सकती है, विशेषकर जब बच्चे अन्य भाषाओं
में भी शिक्षा प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
- वे यह तर्क करते हैं
कि यदि बच्चे केवल मातृभाषा में पढ़ते हैं,
तो वे
वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में असमर्थ हो सकते हैं।
- संविधानिक दृष्टिकोण:
- भारत जैसे बहुभाषी
देश में, मातृभाषा को शिक्षा
का माध्यम बनाना संविधान द्वारा भी समर्थित है। यह विभिन्न भाषाओं और
संस्कृतियों के संरक्षण और विकास में मदद करता है।
- प्रायोगिक दृष्टिकोण:
- कई अध्ययनों से यह
सिद्ध हुआ है कि मातृभाषा में शिक्षा से बच्चों की सीखने की क्षमता में
सुधार होता है। यह उन्हें अन्य विषयों को समझने में भी मदद करता है।
निष्कर्ष:
प्रारम्भिक स्तर पर
मातृभाषा को शिक्षा का माध्यम बनाना एक महत्वपूर्ण निर्णय है। यह न केवल बच्चों की
भाषाई दक्षता को बढ़ाता है, बल्कि उनके सामाजिक और भावनात्मक विकास
में भी सहायक होता है। विभिन्न मतों के आधार पर,
यह स्पष्ट है कि मातृभाषा
शिक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है,
जिसे ध्यान में रखना
आवश्यक है।
UNIT 3
भाषा
संरचना अनि शिक्षण समस्या
1. भाषा की परिभाषा, बुद्ध
रूप, कथित भाषा और लिखित भाषा
भाषा
की परिभाषा:
भाषा एक संचार का माध्यम
है, जो विचारों,
भावनाओं, और
सूचनाओं को व्यक्त करने के लिए ध्वनियों,
शब्दों, और
वाक्यों का उपयोग करती है। यह मानव समाज की एक महत्वपूर्ण विशेषता है, जो
सामाजिक संबंधों को स्थापित करने और बनाए रखने में सहायक होती है।
भाषा
का बुद्ध रूप:
भाषा का बुद्ध रूप वह है, जिसमें
विचारों और भावनाओं को स्पष्टता से व्यक्त किया जाता है। यह भाषा का वह स्तर है, जहाँ
व्यक्ति अपने विचारों को तार्किक और संगठित तरीके से प्रस्तुत करता है।
कथित
भाषा और लिखित भाषा:
- कथित भाषा: यह वह भाषा है, जो मौखिक रूप में बोली जाती है।
इसमें उच्चारण, स्वर, और शारीरिक हाव-भाव का महत्वपूर्ण
योगदान होता है।
- लिखित भाषा: यह वह भाषा है, जो लिखित रूप में व्यक्त की जाती
है। इसमें व्याकरण, वर्तनी, और संरचना का ध्यान रखा जाता है।
2. लिखित भाषा के रूप में पद्य, म
गय भाषा, बोलचाल की भाषा और साहित्यिक भाषा
- पद्य: यह कविता या गीत के रूप में लिखी
जाती है। इसमें लय, छंद, और भावनाओं का समावेश होता है।
उदाहरण: "सूर्य उग्यो, चाँद लुकेको।"
- म गय भाषा: यह सामान्य बोलचाल की भाषा है, जो दैनिक जीवन में उपयोग की जाती
है। यह सरल और स्पष्ट होती है। उदाहरण: "तिमी कस्तो छौ?"
- बोलचाल की भाषा: यह वह भाषा है, जो बातचीत के दौरान उपयोग की जाती
है। इसमें स्थानीय बोलचाल और अभिव्यक्ति का समावेश होता है। उदाहरण:
"तिमी कहाँ जान्छौ?"
- साहित्यिक भाषा: यह वह भाषा है, जो साहित्यिक कृतियों में उपयोग
की जाती है। इसमें गहराई, बोधगम्यता, और कलात्मकता होती है। उदाहरण:
"जीवन एक यात्रा है।"
3. शुद्ध भाषा बोलने और लिखने की दक्षता
अर्जन विधि
शुद्ध
भाषा बोलने और लिखने की दक्षता अर्जन विधियाँ:
- व्याकरण का अध्ययन: भाषा के व्याकरणिक नियमों का
अध्ययन करना आवश्यक है। इससे सही वाक्य संरचना और शब्दों का सही उपयोग समझ
में आता है।
- पठन-पाठन: नियमित रूप से अच्छी साहित्यिक
कृतियों का पठन करना चाहिए। इससे शब्दावली में वृद्धि होती है और लेखन कौशल
में सुधार होता है।
- प्रशिक्षण और अभ्यास: बोलने और लिखने के लिए नियमित
अभ्यास करना चाहिए। यह संवाद कौशल को विकसित करने में मदद करता है।
- फीडबैक: अपने लेखन और बोलने पर फीडबैक
प्राप्त करना आवश्यक है। इससे गलतियों को सुधारने का अवसर मिलता है।
- सुनने की आदत: शुद्ध भाषा सुनने की आदत डालें।
इससे उच्चारण और शब्दों का सही उपयोग सीखने में मदद मिलती है।
4. लिपि – नेपाली भाषा में प्रचलित
देवनागरी और नन्दी नागरी लिपि
देवनागरी
लिपि:
देवनागरी लिपि नेपाली भाषा
की प्रमुख लिपि है। यह एक वर्णात्मक लिपि है,
जिसमें स्वर और व्यंजन के
लिए अलग-अलग अक्षर होते हैं। देवनागरी लिपि में 12
स्वर और 33 व्यंजन
होते हैं। यह लिपि सरलता से पढ़ी और लिखी जा सकती है, और
यह भारतीय उपमहाद्वीप की कई भाषाओं में उपयोग होती है।
नन्दी
नागरी लिपि:
नन्दी नागरी लिपि एक
प्राचीन लिपि है, जो मुख्यतः नेपाल के कुछ क्षेत्रों में
उपयोग होती है। यह लिपि देवनागरी से भिन्न है,
और इसका उपयोग विशेष रूप
से धार्मिक और सांस्कृतिक ग्रंथों में किया जाता है। हालांकि, यह
लिपि आजकल कम प्रचलित है।
5. नेपाली भाषा शिक्षण में देखी गई
विभिन्न कठिनाइयाँ – कारण और निवारण के उपाय
कठिनाइयाँ:
- भाषाई विविधता: नेपाल में विभिन्न भाषाएँ और
बोलियाँ प्रचलित हैं, जिससे मातृभाषा में
शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
- शिक्षण सामग्री की
कमी: कई बार शिक्षकों के
पास उचित शिक्षण सामग्री और संसाधनों की कमी होती है, जिससे शिक्षण प्रक्रिया प्रभावित
होती है।
- शिक्षकों का
प्रशिक्षण: कई शिक्षकों को
मातृभाषा शिक्षण के लिए उचित प्रशिक्षण नहीं मिलता, जिससे वे प्रभावी ढंग से शिक्षण
नहीं कर पाते।
- छात्रों की रुचि की
कमी: कुछ छात्रों में
मातृभाषा के प्रति रुचि की कमी होती है,
जिससे वे
सीखने में असमर्थ होते हैं।
निवारण
के उपाय:
- शिक्षण सामग्री का
विकास: शिक्षण सामग्री और
संसाधनों का विकास करना चाहिए,
ताकि शिक्षकों
को उचित सामग्री उपलब्ध हो सके।
- शिक्षकों का
प्रशिक्षण: शिक्षकों के लिए
नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए,
ताकि वे
नवीनतम शिक्षण विधियों से अवगत हो सकें।
- छात्रों की रुचि
बढ़ाना: मातृभाषा को रोचक और
आकर्षक बनाने के लिए खेल, कहानियाँ, और गतिविधियों का उपयोग करना
चाहिए।
- भाषाई विविधता का सम्मान: विभिन्न भाषाओं और बोलियों का
सम्मान करते हुए, मातृभाषा शिक्षण को
समावेशी बनाना चाहिए।
निष्कर्ष:
भाषा संरचना और शिक्षण
समस्याएँ एक जटिल विषय हैं, जो समाज के विभिन्न पहलुओं से जुड़ी
होती हैं। मातृभाषा शिक्षण में सुधार के लिए उचित उपायों को अपनाना आवश्यक है, ताकि
छात्रों को उनकी मातृभाषा में दक्षता प्राप्त हो सके और वे अपनी सांस्कृतिक पहचान
को समझ सकें।
UNIT -4
भाषा
र मानसिक-सामाजिक विकास
1. प्रथम भाषा (मातृभाषा), द्वितीय
भाषा अनि आदान-प्रदानको भाषा
प्रथम
भाषा (मातृभाषा):
मातृभाषा व्यक्ति द्वारा
परिवार र समाजबाट सिकिएको पहिलो भाषा हो। यो भाषा व्यक्ति को भावनात्मक र
सांस्कृतिक पहिचानको अभिव्यक्ति हो। मातृभाषामा शिक्षा प्राप्त गर्दा, बच्चाहरूको
सोच र भावनाहरूको विकासमा मद्दत पुग्छ।
द्वितीय
भाषा:
द्वितीय भाषा त्यो भाषा हो, जुन
व्यक्ति मातृभाषा पछि सिक्छ। यो भाषा विभिन्न कारणहरूले सिक्न सकिन्छ, जस्तै
विद्यालय, सामाजिक वातावरण, वा
प्रवास। द्वितीय भाषा सिक्नाले व्यक्तिको सोचने क्षमतामा वृद्धि हुन्छ र विभिन्न
संस्कृतिहरूसँगको सम्पर्कमा मद्दत गर्दछ।
आदान-प्रदानको
भाषा:
आदान-प्रदानको भाषा त्यो
भाषा हो, जसमा व्यक्तिहरू बीच संवाद र विचारहरूको
आदान-प्रदान हुन्छ। यो भाषा सामाजिक सम्बन्धहरूलाई सुदृढ पार्न र विचारहरूको
स्पष्टता ल्याउन महत्त्वपूर्ण छ।
2. आदान-प्रदान अनि चिन्तनको रूपमा भाषा
भाषा आदान-प्रदानको
माध्यम मात्र होइन, यो चिन्तनको प्रक्रिया पनि हो। भाषा व्यक्तिको
सोच र विचारलाई संरचना दिन्छ। जब व्यक्तिहरू विचारहरूलाई शब्दमा व्यक्त गर्छन्, तब
उनीहरूको सोचने प्रक्रिया स्पष्ट हुन्छ।
- चिन्तनको प्रक्रिया: भाषा व्यक्तिको सोचमा गहिराई
ल्याउँछ। विचारहरूलाई शब्दमा व्यक्त गर्दा,
व्यक्ति तर्क
गर्न, विश्लेषण गर्न, र निर्णय गर्न सक्षम हुन्छ।
- सामाजिक संवाद: भाषा आदान-प्रदानको माध्यमले
सामाजिक संवादलाई सशक्त बनाउँछ। यसले व्यक्तिहरूलाई विचारहरू साझा गर्न, समस्याहरू समाधान गर्न, र सहयोग गर्न मद्दत गर्दछ।
3. श्रेणी कक्षामा भाषाद्वारा बौद्धिक
विकास
शिक्षा प्रणालीमा
भाषा बौद्धिक विकासको एक महत्वपूर्ण साधन हो। विद्यालयमा भाषा शिक्षणले
विद्यार्थीहरूको सोचने क्षमतामा सुधार ल्याउँछ।
- सामग्रीको समझ: भाषा शिक्षणले विद्यार्थीहरूलाई
पाठ्यक्रमको सामग्रीलाई बुझ्नमा मद्दत गर्दछ।
- सृजनात्मकता र
आलोचनात्मक सोच: भाषा शिक्षणले
विद्यार्थीहरूको सृजनात्मकता र आलोचनात्मक सोचको विकासमा योगदान पुर्याउँछ।
- समस्या समाधान: भाषा शिक्षणले विद्यार्थीहरूलाई
समस्याहरूको समाधान गर्न र विचारहरूलाई स्पष्टता दिन सक्षम बनाउँछ।
4. समाजसित भाषाको सम्बन्ध
भाषा र समाजबीचको
सम्बन्ध अत्यन्त गहिरो छ। भाषा समाजको सांस्कृतिक,
ऐतिहासिक, र
सामाजिक पहिचानको अभिव्यक्ति हो।
- सामाजिक संरचना: भाषा समाजको संरचना र
सम्बन्धहरूलाई परिभाषित गर्दछ। यसले व्यक्तिहरूलाई एक अर्कासँग जडान गर्न र
सामाजिक समूहहरूमा समावेश गर्न मद्दत गर्दछ।
- संस्कृति र परंपरा: भाषा संस्कृति र परंपराको
संरक्षणमा महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछ। यसले सांस्कृतिक मूल्य र
मान्यताहरूलाई सँगै ल्याउँछ।
5. पूर्व बाल्यावस्था अनि पाल्यावस्थामा
भाषा सिकाइ प्रक्रिया
पूर्व
बाल्यावस्था:
बाल्यावस्थामा भाषा सिकाइ
प्रक्रिया प्रारम्भ हुन्छ। बच्चाहरूले आफ्नो मातृभाषा सिक्न सुरु गर्छन्, जसले
उनीहरूको भावनात्मक र सामाजिक विकासमा मद्दत गर्दछ।
- सुनने र बोल्ने: बच्चाहरूले सुनने र बोल्ने
क्षमतामा विकास गर्छन्। यसले उनीहरूको सामाजिक सम्बन्ध र संवाद कौशलमा सुधार
ल्याउँछ।
पाल्यावस्था:
पाल्यावस्थामा, बच्चाहरूले
द्वितीय भाषा सिक्न थाल्छन्। यसले उनीहरूको सोच र बौद्धिक विकासमा योगदान
पुर्याउँछ।
- पठन र लेखन: विद्यालयमा पठन र लेखनको
माध्यमबाट भाषा सिकाइ प्रक्रिया जारी रहन्छ। यसले बच्चाहरूलाई विचारहरूलाई
स्पष्टता दिन र संवाद गर्न सक्षम बनाउँछ।
6. भाषासम्बन्धी दक्षता, कर्तव्य
अनि उत्तरदायित्व
दक्षता:
भाषासम्बन्धी दक्षता भनेको
व्यक्तिको भाषा बोल्ने, लेख्ने,
र बुझ्ने क्षमतामा सुधार
ल्याउनु हो। यो दक्षता सामाजिक र शैक्षिक जीवनमा महत्त्वपूर्ण छ।
कर्तव्य:
व्यक्तिहरूको कर्तव्य हो
कि उनीहरूले आफ्नो मातृभाषा र अन्य भाषाहरूको ज्ञानलाई सुदृढ पार्न प्रयास
गर्नुपर्छ। यसले उनीहरूको सामाजिक र सांस्कृतिक पहिचानलाई मजबुत बनाउँछ।
उत्तरदायित्व:
भाषा शिक्षणमा शिक्षक र
अभिभावकहरूको उत्तरदायित्व हुन्छ कि उनीहरूले बच्चाहरूलाई भाषा सिक्न र प्रयोग
गर्न प्रोत्साहित गर्नुपर्छ। यसले बच्चाहरूको मानसिक र सामाजिक विकासमा
महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछ।
निष्कर्ष
भाषा र
मानसिक-सामाजिक विकास एक अर्कासँग गहिरो सम्बन्धित छन्। मातृभाषा, द्वितीय
भाषा, र आदान-प्रदानको भाषा सबैले व्यक्तिको सोच, सामाजिक
सम्बन्ध, र बौद्धिक विकासमा महत्त्वपूर्ण भूमिका
खेल्दछन्। भाषा सिकाइ प्रक्रिया बाल्यावस्थामा प्रारम्भ हुन्छ र यसले व्यक्तिको
जीवनभरि प्रभाव पार्छ। यसैले, भाषा शिक्षणमा उचित ध्यान र प्रयास
आवश्यक छ।
UNIT 5
भाषा
शिक्षणका विभिन्न स्तर अनि दक्षता विकास
1. श्रवण (अपणसुनाई) को महत्व, आंशिक
अनि एकाग्र सुनाईका विधि
श्रवणको
महत्व:
श्रवण भाषा शिक्षणको पहिलो
र महत्वपूर्ण चरण हो। यसले व्यक्तिलाई भाषा बुझ्न,
उच्चारण, र
संवाद कौशलमा सुधार गर्न मद्दत गर्दछ। श्रवणले व्यक्तिको सोच र भावनात्मक विकासमा
पनि योगदान पुर्याउँछ।
- सामाजिक सम्बन्ध: श्रवणले व्यक्तिलाई सामाजिक
सम्बन्धहरूमा संलग्न गर्न मद्दत गर्दछ। यसले संवाद र विचारहरूको
आदान-प्रदानमा महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछ।
- सुननेको क्षमता: श्रवणले व्यक्तिको सुननेको
क्षमतामा सुधार ल्याउँछ, जसले उनीहरूलाई अन्य
व्यक्तिहरूसँग राम्रोसँग संवाद गर्न सक्षम बनाउँछ।
आंशिक
सुनाईका विधि:
आंशिक सुनाईमा, व्यक्तिले
केवल महत्वपूर्ण जानकारीलाई ध्यानमा राख्छ। यसमा निम्नलिखित विधिहरू समावेश छन्:
- सुननेको नोट्स
बनाउने: महत्वपूर्ण
बुँदाहरूलाई नोट्समा लेख्ने।
- सुननेको समय सीमित
गर्ने: छोटो समयको लागि
ध्यान केन्द्रित गर्ने।
एकाग्र
सुनाईका विधि:
एकाग्र सुनाईमा, व्यक्तिले
सम्पूर्ण जानकारीलाई ध्यानपूर्वक सुनिन्छ। यसमा निम्नलिखित विधिहरू समावेश छन्:
- सुननेको अभ्यास: ध्यानपूर्वक सुननेको लागि विभिन्न
सामग्रीहरू प्रयोग गर्ने।
- सुननेको गतिविधिहरू: समूहमा सुननेको गतिविधिहरूमा भाग
लिने।
2. श्रवण कक्षामा प्रयोग – बाल गीत, बाल
कविता, लघु कथा, रेडियो, टीभी, आलोचना, संवाद, खेलकूद, इत्यादि
बाल
गीत:
बाल गीतहरूमा सरल र आकर्षक
शब्दहरू हुन्छन्, जसले बच्चाहरूलाई भाषा सिक्नमा मद्दत गर्दछ।
गीतहरूमा लय र रिदमले सुननेको अनुभवलाई रमाइलो बनाउँछ।
बाल
कविता:
बाल कविताहरूले
बच्चाहरूलाई भाषा र भावनाहरूको अभिव्यक्ति गर्न मद्दत गर्दछ। यसले उनीहरूको
कल्पनाशीलता र सृजनात्मकता विकासमा योगदान पुर्याउँछ।
लघु
कथा:
लघु कथाहरूले बच्चाहरूलाई
नैतिक शिक्षा र सामाजिक मूल्यहरूको बारेमा जानकारी दिन्छ। यसले सुननेको क्षमतामा
सुधार ल्याउँछ र विचारहरूको आदान-प्रदानमा मद्दत गर्दछ।
रेडियो
र टीभी:
रेडियो र टीभीमा विभिन्न
कार्यक्रमहरूमा भाग लिनेले बच्चाहरूलाई भाषा र संवाद कौशलमा सुधार गर्न मद्दत
गर्दछ। यसले उनीहरूको सुननेको क्षमता र सामाजिक ज्ञानमा वृद्धि गर्दछ।
आलोचना
र संवाद:
आलोचना र संवादमा भाग
लिनेले बच्चाहरूलाई विचारहरूको स्पष्टता र तर्क गर्ने क्षमतामा सुधार ल्याउँछ।
यसले उनीहरूको सामाजिक सम्बन्धलाई सुदृढ बनाउँछ।
खेलकूद:
खेलकूदमा भाग लिनेले
बच्चाहरूलाई समूहमा काम गर्न र संवाद गर्न मद्दत गर्दछ। यसले उनीहरूको सुननेको
क्षमता र सामाजिक कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
3. कथन/बोलाई अभ्यास – लघुकथा, बालगीत, आवृत्ति, बातचीत
अभ्यास
लघुकथा:
लघुकथाहरूको माध्यमबाट
बच्चाहरूलाई विचार र भावनाहरूलाई व्यक्त गर्न अभ्यास गराइन्छ। यसले उनीहरूको
बोलाईमा सुधार ल्याउँछ।
बालगीत:
बालगीतहरू गाउने अभ्यासले
बच्चाहरूको उच्चारण र शब्दावलीमा सुधार ल्याउँछ। यसले उनीहरूको आत्मविश्वासमा पनि
वृद्धि गर्दछ।
आवृत्ति:
आवृत्ति अभ्यासले
बच्चाहरूलाई नियमित रूपमा बोल्न र सुननेको क्षमतामा सुधार ल्याउँछ। यसले उनीहरूको
संवाद कौशलमा वृद्धि गर्दछ।
बातचीत
अभ्यास:
बातचीत अभ्यासले
बच्चाहरूलाई विचारहरूको आदान-प्रदान गर्न र सामाजिक सम्बन्धहरूलाई सुदृढ बनाउन
मद्दत गर्दछ। यसले उनीहरूको बोलाईमा सुधार ल्याउँछ।
4. पठन – आदर्श पठन, सस्वर
पठन, मौन पठन, व्यक्तिगत
पठन, सामूहिक पठन, सूचना
आधारित पठन सामग्री
आदर्श
पठन:
आदर्श पठनमा, विद्यार्थीहरूले
पाठ्य सामग्रीलाई सही उच्चारण र व्याकरणका साथ पढ्छन्। यसले उनीहरूको पठन कौशलमा
सुधार ल्याउँछ।
सस्वर
पठन:
सस्वर पठनमा, विद्यार्थीहरूले
आवाजमा पढ्छन्। यसले उच्चारण र शब्दावलीमा सुधार ल्याउँछ।
मौन
पठन:
मौन पठनमा, विद्यार्थीहरूले
चुपचाप पढ्छन्। यसले उनीहरूको सोच र समझमा सुधार ल्याउँछ।
व्यक्तिगत
पठन:
व्यक्तिगत पठनमा, विद्यार्थीहरूले
एक्लै पढ्छन्। यसले उनीहरूको आत्मनिर्भरता र पठन कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
सामूहिक
पठन:
सामूहिक पठनमा, विद्यार्थीहरू
समूहमा पढ्छन्। यसले विचारहरूको आदान-प्रदान र सामाजिक सम्बन्धमा सुधार ल्याउँछ।
सूचना
आधारित पठन सामग्री:
सूचना आधारित पठन
सामग्रीले विद्यार्थीहरूलाई ज्ञान र जानकारीमा वृद्धि गर्न मद्दत गर्दछ। यसले
उनीहरूको सोच र बौद्धिक विकासमा योगदान पुर्याउँछ।
5. लेखन – अनुलेखन, प्रतिलेखन, श्रुतिलेखन, सृजनात्मक
लेखन, सुन्दर हस्तलिपि अभ्यास
अनुलेखन:
अनुलेखनमा, विद्यार्थीहरूले
शिक्षकको लेखनलाई अनुकरण गर्छन्। यसले लेखन कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
प्रतिलेखन:
प्रतिलेखनमा, विद्यार्थीहरूले
पाठ्य सामग्रीलाई पुनः लेख्छन्। यसले उनीहरूको लेखनमा स्पष्टता र सहीता ल्याउँछ।
श्रुतिलेखन:
श्रुतिलेखनमा, विद्यार्थीहरूले
सुनिएको सामग्रीलाई लेख्छन्। यसले सुनने र लेखन कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
सृजनात्मक
लेखन:
सृजनात्मक लेखनमा, विद्यार्थीहरूले
आफ्ना विचार र भावनाहरूलाई व्यक्त गर्छन्। यसले उनीहरूको सृजनात्मकता र लेखन
कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
सुन्दर
हस्तलिपि अभ्यास:
सुन्दर हस्तलिपि अभ्यासले
विद्यार्थीहरूको लेखनको स्पष्टता र सुन्दरता सुधार गर्न मद्दत गर्दछ। यसले
उनीहरूको आत्मविश्वासमा वृद्धि गर्दछ।
6. हिज्जे प्रणाली – शुद्ध लेखन, हिज्जे
भूलका कारण र निवारण उपाय
हिज्जे
प्रणाली:
हिज्जे प्रणालीले
शब्दहरूको सही लेखन र उच्चारणमा ध्यान दिन्छ। शुद्ध लेखनले व्यक्तिको भाषा दक्षता
र संचार क्षमतामा सुधार ल्याउँछ।
हिज्जे
भूलका कारण:
- शिक्षणको कमी: सही शिक्षण विधि र सामग्रीको
कमीले हिज्जे भूलमा वृद्धि गर्न सक्छ।
- ध्यानको कमी: विद्यार्थीहरूको ध्यान नदिने
कारणले पनि हिज्जे भूल हुन सक्छ।
- अभ्यासको कमी: नियमित अभ्यासको कमीले पनि
हिज्जेमा समस्या ल्याउँछ।
निवारण
उपाय:
- सही शिक्षण विधि: सही शिक्षण विधिहरूको प्रयोग
गर्नुपर्छ, जसले
विद्यार्थीहरूलाई हिज्जेमा सुधार ल्याउन मद्दत गर्दछ।
- नियमित अभ्यास: नियमित रूपमा हिज्जे अभ्यास
गराउनु पर्छ।
- फीडबैक: विद्यार्थीहरूको लेखनमा फीडबैक
दिनु पर्छ, जसले उनीहरूलाई सुधार
गर्न मद्दत गर्दछ।
7. शब्द भण्डार निर्माण – अर्थ सहित
प्रयोग, शब्दकोश, विश्वकोश, इन्टरनेट, पत्रिका, साहित्य
शब्द
भण्डार निर्माण:
शब्द भण्डार निर्माणले
व्यक्तिको भाषा दक्षता र संवाद क्षमतामा सुधार ल्याउँछ। यसमा निम्नलिखित विधिहरू
समावेश छन्:
- अर्थ सहित प्रयोग: नयाँ शब्दहरूको अर्थ र प्रयोगलाई
बुझ्न महत्त्वपूर्ण छ। यसले शब्दको सही प्रयोगमा मद्दत गर्दछ।
- शब्दकोश: शब्दकोशको प्रयोगले
विद्यार्थीहरूलाई नयाँ शब्दहरूको अर्थ र प्रयोग बुझ्नमा मद्दत गर्दछ।
- विश्वकोश: विश्वकोशले विभिन्न विषयहरूको
बारेमा जानकारी दिन्छ, जसले शब्द भण्डारमा
वृद्धि गर्दछ।
- इन्टरनेट: इन्टरनेटमा विभिन्न श्रोतहरूमा
पहुँचले विद्यार्थीहरूलाई नयाँ शब्द र जानकारीमा वृद्धि गर्न मद्दत गर्दछ।
- पत्रिका र साहित्य: पत्रिका र साहित्यमा विभिन्न
शब्दहरूको प्रयोगले विद्यार्थीहरूको शब्द भण्डारमा वृद्धि गर्दछ।
निष्कर्ष
भाषा शिक्षणका
विभिन्न स्तर र दक्षता विकासका विधिहरूले विद्यार्थीहरूको भाषा कौशलमा सुधार
ल्याउँछन्। श्रवण, कथन,
पठन, लेखन, हिज्जे
प्रणाली, र शब्द भण्डार निर्माणका माध्यमबाट
विद्यार्थीहरूलाई भाषा सिक्न र प्रयोग गर्न सक्षम बनाइन्छ। यसले उनीहरूको मानसिक र
सामाजिक विकासमा महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछ।
UNIT 6
नेपाली
भाषा शिक्षण पद्धति
1. सरकारद्वारा अनुमोदित पाठ्यपुस्तकहरूको
समालोचनात्मक प्रस्तुतिकरण (कक्षा 1–8)
सरकारद्वारा
अनुमोदित पाठ्यपुस्तकहरू नेपाली भाषा शिक्षणको आधारभूत स्रोत हुन्। यी
पाठ्यपुस्तकहरूमा निम्नलिखित विशेषताहरू समावेश छन्:
- सामग्रीको विविधता: पाठ्यपुस्तकहरूमा कविता, कथा, निबन्ध, र संवाद जस्ता विभिन्न प्रकारका
साहित्यिक सामग्री समावेश गरिएको छ। यसले विद्यार्थीहरूको रुचि र सृजनात्मकता
विकासमा मद्दत गर्दछ।
- उपयुक्तता: कक्षा 1 देखि 8 सम्मका पाठ्यपुस्तकहरूमा
सामग्रीको स्तर र जटिलता क्रमशः बढाइएको छ। यसले विद्यार्थीहरूको बौद्धिक
विकासमा सहयोग पुर्याउँछ।
- शिक्षण विधि: पाठ्यपुस्तकहरूमा शिक्षण
विधिहरूको स्पष्ट निर्देशन दिइएको छ,
जसले
शिक्षकलाई प्रभावकारी शिक्षणमा मद्दत गर्दछ।
- सामाजिक र सांस्कृतिक
मूल्य: पाठ्यपुस्तकहरूमा
नेपाली संस्कृति, परंपरा, र सामाजिक मूल्यहरूको समावेश
गरिएको छ, जसले
विद्यार्थीहरूलाई आफ्नो पहिचान र मूल्यहरूको बारेमा जानकारी दिन्छ।
2. वर्णकनिक, शब्दकनिक, वाक्यकनिक
पद्धति
वर्णकनिक
पद्धति:
वर्णकनिक पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूलाई
वर्णहरूको अध्ययन गराइन्छ। यसमा स्वर र व्यंजनहरूको सही उच्चारण र लेखनमा ध्यान
केन्द्रित गरिन्छ। यस पद्धतिले विद्यार्थीहरूको आधारभूत भाषा कौशलमा सुधार
ल्याउँछ।
शब्दकनिक
पद्धति:
शब्दकनिक पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूलाई
शब्दहरूको अर्थ र प्रयोगमा ध्यान दिन्छ। यसमा नयाँ शब्दहरूको अध्ययन, शब्दकोशको
प्रयोग, र शब्दहरूको सृजनात्मक प्रयोगमा ध्यान
केन्द्रित गरिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूको शब्द भण्डारमा वृद्धि गर्दछ।
वाक्यकनिक
पद्धति:
वाक्यकनिक पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूलाई
वाक्यहरूको संरचना र प्रयोगमा ध्यान दिन्छ। यसमा सही व्याकरण, वाक्य
निर्माण, र संवाद कौशलमा सुधार ल्याउन मद्दत गर्दछ।
यस पद्धतिले विद्यार्थीहरूको लेखन र बोलाईमा सुधार ल्याउँछ।
3. बालगीत, अनुकरण-
अभिनय पद्धति, प्रकल्प पद्धति, अनुबन्ध
पद्धति, आलोचनात्मक पद्धति
बालगीत:
बालगीतहरूमा सरल र आकर्षक
शब्दहरू हुन्छन्, जसले बच्चाहरूलाई भाषा सिक्नमा मद्दत गर्दछ।
गीतहरूमा लय र रिदमले सुननेको अनुभवलाई रमाइलो बनाउँछ। यसले उच्चारण र शब्दावलीमा
सुधार ल्याउँछ।
अनुकरण-
अभिनय पद्धति:
यस पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूले
कुनै कथा वा संवादलाई अनुकरण गरेर अभिनय गर्छन्। यसले उनीहरूको बोलाई, उच्चारण, र
सामाजिक कौशलमा सुधार ल्याउँछ। यसले विद्यार्थीहरूको सृजनात्मकता र आत्मविश्वासमा
वृद्धि गर्दछ।
प्रकल्प
पद्धति:
प्रकल्प पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूले
समूहमा काम गरेर कुनै विशेष विषयमा प्रोजेक्ट तयार गर्छन्। यसले उनीहरूको
अनुसन्धान, विचारहरूको आदान-प्रदान, र
समूहमा काम गर्ने क्षमतामा सुधार ल्याउँछ।
अनुबन्ध
पद्धति:
अनुबन्ध पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूले
विभिन्न विषयहरूमा सम्बन्धित सामग्री अध्ययन गर्छन्। यसले उनीहरूको सोच र बौद्धिक
विकासमा योगदान पुर्याउँछ। यसले विषयहरूको बीचको सम्बन्धलाई बुझ्नमा मद्दत गर्दछ।
आलोचनात्मक
पद्धति:
आलोचनात्मक पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूलाई
सामग्रीको आलोचना गर्न र विचारहरूको विश्लेषण गर्न प्रोत्साहित गरिन्छ। यसले
उनीहरूको तर्क गर्ने क्षमता र विचारहरूको स्पष्टता विकासमा मद्दत गर्दछ।
4. पाठ्यपुस्तक बाहिरका स्रोत – समाचार
पत्र, लोककथा, शिशु
साहित्य आदि
समाचार
पत्र:
समाचार पत्रहरूले
विद्यार्थीहरूलाई समसामयिक घटनाहरू र समाचारहरूको बारेमा जानकारी दिन्छ। यसले
उनीहरूको पठन कौशलमा सुधार ल्याउँछ र सामाजिक ज्ञानमा वृद्धि गर्दछ।
लोककथा:
लोककथाहरूले नेपाली
संस्कृति र परंपराको बारेमा जानकारी दिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूको कल्पनाशीलता र
सृजनात्मकता विकासमा मद्दत गर्दछ। लोककथाहरूमा नैतिक शिक्षा पनि समावेश हुन्छ।
शिशु
साहित्य:
शिशु साहित्यले
बच्चाहरूलाई सरल र रोचक कथाहरूको माध्यमबाट भाषा सिक्नमा मद्दत गर्दछ। यसले
उनीहरूको सोच र भावनात्मक विकासमा योगदान पुर्याउँछ।
अन्य
स्रोतहरू:
- इन्टरनेट: इन्टरनेटमा विभिन्न श्रोतहरूमा
पहुँचले विद्यार्थीहरूलाई नयाँ शब्द र जानकारीमा वृद्धि गर्न मद्दत गर्दछ।
- साहित्यिक कृतिहरू: साहित्यिक कृतिहरूमा विभिन्न
शब्दहरूको प्रयोगले विद्यार्थीहरूको शब्द भण्डारमा वृद्धि गर्दछ।
निष्कर्ष
नेपाली भाषा शिक्षण
पद्धतिहरूले विद्यार्थीहरूको भाषा कौशलमा सुधार ल्याउन महत्त्वपूर्ण भूमिका
खेल्दछन्। पाठ्यपुस्तकहरूको समालोचनात्मक प्रस्तुतिकरण, वर्णकनिक, शब्दकनिक, वाक्यकनिक
पद्धति, र विभिन्न शिक्षण विधिहरूले विद्यार्थीहरूको
बौद्धिक र सामाजिक विकासमा योगदान पुर्याउँछन्। पाठ्यपुस्तक बाहिरका स्रोतहरूको
प्रयोगले विद्यार्थीहरूको ज्ञान र सोचमा वृद्धि गर्न महत्त्वपूर्ण छ। यसैले, प्रभावकारी
भाषा शिक्षणका लागि विविध पद्धतिहरूको समावेश आवश्यक छ।
UNIT 7
व्याकरण
शिक्षण कार्यगत
1. व्याकरण शिक्षणको लक्ष्य, उद्देश्य
अनि प्रयोजनियता
लक्ष्य:
व्याकरण शिक्षणको मुख्य
लक्ष्य विद्यार्थीहरूलाई भाषा संरचना र नियमहरूको ज्ञान प्रदान गर्नु हो। यसले
उनीहरूलाई सही र स्पष्ट रूपमा बोल्न र लेख्न सक्षम बनाउँछ।
उद्देश्य:
- भाषाई दक्षता: विद्यार्थीहरूलाई व्याकरणका
नियमहरूको सही प्रयोगमा दक्ष बनाउनु।
- संचार कौशल: विद्यार्थीहरूको बोलचाल र लेखनमा
स्पष्टता र प्रभावशीलता ल्याउनु।
- सृजनात्मकता: विद्यार्थीहरूलाई व्याकरणका
नियमहरूको प्रयोग गरेर सृजनात्मक लेखनमा प्रोत्साहित गर्नु।
- समस्या समाधान: विद्यार्थीहरूलाई व्याकरणका
समस्याहरूको समाधान गर्न सक्षम बनाउनु।
प्रयोजनियता:
- शिक्षा र करियर: व्याकरणको ज्ञानले
विद्यार्थीहरूको शैक्षिक र व्यावसायिक जीवनमा सफलता प्राप्त गर्न मद्दत
गर्दछ।
- सामाजिक सम्बन्ध: सही व्याकरणको प्रयोगले सामाजिक
संवादमा स्पष्टता र प्रभावशीलता ल्याउँछ।
- सांस्कृतिक पहिचान: व्याकरण शिक्षणले भाषा र संस्कृति
बीचको सम्बन्धलाई बुझ्नमा मद्दत गर्दछ।
2. व्याकरण शिक्षण पद्धतिहरू – आगमन, निगमन, सूत्र
पद्धति
आगमन
पद्धति (Inductive Method):
यस पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूलाई
व्याकरणका नियमहरू उदाहरणहरूको माध्यमबाट बुझाइन्छ। विद्यार्थीहरू विभिन्न
वाक्यहरूमा व्याकरणका नियमहरूको अवलोकन गरेर नियमहरू निकाल्छन्।
- उदाहरण: शिक्षकले विभिन्न वाक्यहरू
प्रस्तुत गर्छन् र विद्यार्थीहरूलाई नियम निकाल्न प्रोत्साहित गर्छन्।
निगमन
पद्धति (Deductive Method):
यस पद्धतिमा, शिक्षकले
पहिले व्याकरणको नियम बताउँछन् र त्यसपछि विद्यार्थीहरूलाई उदाहरणहरूमा लागू गर्न
प्रोत्साहित गर्छन्।
- उदाहरण: शिक्षकले "वर्तमान काल"
को नियम बताउँछन् र त्यसपछि विद्यार्थीहरूलाई वाक्यहरू बनाउन भन्छन्।
सूत्र
पद्धति (Formulaic Method):
यस पद्धतिमा, विद्यार्थीहरूलाई
व्याकरणका नियमहरूलाई सूत्रको रूपमा प्रस्तुत गरिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूलाई
नियमहरूलाई सजिलै सम्झन र प्रयोग गर्न मद्दत गर्दछ।
- उदाहरण: "सर्वनाम + क्रिया + वस्तु"
को सूत्रमा वाक्य निर्माण गर्न प्रोत्साहित गरिन्छ।
3. कार्यगत अभ्यास – निर्देशित पाठ्यसूची
अनुसार
कार्यगत अभ्यासले
विद्यार्थीहरूलाई व्याकरणका नियमहरूलाई व्यवहारमा लागू गर्न मद्दत गर्दछ। यसमा
निम्नलिखित गतिविधिहरू समावेश छन्:
- वाक्य निर्माण: विद्यार्थीहरूलाई विभिन्न
व्याकरणिक संरचनाहरूको प्रयोग गरेर वाक्य बनाउन प्रोत्साहित गरिन्छ।
- व्याकरणिक खेल: खेलहरूको माध्यमबाट
विद्यार्थीहरूलाई व्याकरणका नियमहरूको अभ्यास गराइन्छ। जस्तै, "शब्दकोष खेल" जहाँ
विद्यार्थीहरूले सही व्याकरणिक रूप चयन गर्नुपर्छ।
- समूह चर्चा: विद्यार्थीहरूलाई समूहमा
व्याकरणका नियमहरूको बारेमा चर्चा गर्न र विचारहरू साझा गर्न प्रोत्साहित
गरिन्छ।
4. पर्यायवाची, विपरीतार्थक, अनेकार्थक, भिन्नार्थ
शब्दहरूको प्रयोग
- पर्यायवाची शब्द: यी शब्दहरूले समान अर्थ व्यक्त
गर्छन्। उदाहरण: "सुन्दर" र "रमणीय"।
- विपरीतार्थक शब्द: यी शब्दहरूले विपरीत अर्थ व्यक्त
गर्छन्। उदाहरण: "गर्मी" र "चिसो"।
- अनेकार्थक शब्द: यी शब्दहरूले विभिन्न अर्थ व्यक्त
गर्छन्। उदाहरण: "बैंक" (नदीको किनारा र वित्तीय संस्था)।
- भिन्नार्थ शब्द: यी शब्दहरूले भिन्न अर्थ व्यक्त
गर्छन्, तर समान ध्वनि
हुन्छन्। उदाहरण: "कान" (शरीरको अंग) र "कान" (सुननेको
क्रिया)।
प्रयोग:
विद्यार्थीहरूलाई यी
शब्दहरूको प्रयोग गरेर वाक्य बनाउन प्रोत्साहित गरिन्छ। यसले उनीहरूको शब्द
भण्डारमा वृद्धि गर्दछ र भाषा प्रयोगमा विविधता ल्याउँछ।
5. लेखन अभ्यास – पत्र लेखन, निबन्ध, आवेदन, प्रतिवेदन, अनुच्छेद, भाव
संक्षेप/विस्तार
पत्र
लेखन:
विद्यार्थीहरूलाई औपचारिक
र अनौपचारिक पत्र लेख्न अभ्यास गराइन्छ। यसले उनीहरूको संवाद कौशलमा सुधार
ल्याउँछ।
- उदाहरण: "प्रिय मित्रलाई पत्र
लेख्नुहोस्।"
निबन्ध
लेखन:
विद्यार्थीहरूलाई विभिन्न
विषयमा निबन्ध लेख्न प्रोत्साहित गरिन्छ। यसले उनीहरूको विचार व्यक्त गर्ने क्षमता
र लेखन कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
- उदाहरण: "मेरो प्रिय खेल" शीर्षकमा निबन्ध लेख्नुहोस्।
आवेदन
लेखन:
विद्यार्थीहरूलाई विभिन्न
संस्थाहरूमा आवेदन लेख्न अभ्यास गराइन्छ। यसले औपचारिक लेखनमा दक्षता विकासमा
मद्दत गर्दछ।
- उदाहरण: "विद्यालयमा प्रवेशको लागि आवेदन
लेख्नुहोस्।"
प्रतिवेदन
लेखन:
विद्यार्थीहरूलाई
घटनाहरूको प्रतिवेदन लेख्न अभ्यास गराइन्छ। यसले उनीहरूको विश्लेषणात्मक सोच र
लेखन कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
- उदाहरण: "विद्यालयको वार्षिक उत्सवको
प्रतिवेदन लेख्नुहोस्।"
अनुच्छेद
लेखन:
विद्यार्थीहरूलाई विभिन्न
विषयमा अनुच्छेद लेख्न प्रोत्साहित गरिन्छ। यसले उनीहरूको विचारलाई स्पष्टता र
संरचना दिनमा मद्दत गर्दछ।
- उदाहरण: "शिक्षाको महत्व" विषयमा
अनुच्छेद लेख्नुहोस्।
भाव
संक्षेप/विस्तार:
विद्यार्थीहरूलाई कुनै
पाठको भाव संक्षेप गर्न र विस्तारित गर्न अभ्यास गराइन्छ। यसले उनीहरूको समझ र
विश्लेषणात्मक क्षमतामा सुधार ल्याउँछ।
- उदाहरण: "कुनै लघुकथाको भाव संक्षेप
लेख्नुहोस्।"
निष्कर्ष
व्याकरण शिक्षण
कार्यगतले विद्यार्थीहरूको भाषा कौशलमा सुधार ल्याउन महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछ।
व्याकरण शिक्षणको लक्ष्य, उद्देश्य, र
प्रयोजनियता स्पष्ट पार्नाले विद्यार्थीहरूलाई भाषा प्रयोगमा दक्ष बनाउँछ। विभिन्न
पद्धतिहरू, कार्यगत अभ्यास, र
लेखन अभ्यासले विद्यार्थीहरूको बौद्धिक र सामाजिक विकासमा योगदान पुर्याउँछन्।
यसैले, प्रभावकारी व्याकरण शिक्षणका लागि विविध
विधिहरूको समावेश आवश्यक छ।
UNIT 8
भाषा
शिक्षण सहायक उपकरणहरू
1. भाषा शिक्षण सिकाइ उपकरणहरूको आवश्यकता
र महत्व
भाषा शिक्षणमा
सहायक उपकरणहरूको प्रयोगले शिक्षण प्रक्रिया र सिकाइलाई प्रभावकारी बनाउँछ। यी
उपकरणहरूले निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछन्:
- सामग्रीको स्पष्टता: सहायक उपकरणहरूले शिक्षण
सामग्रीलाई स्पष्ट र आकर्षक बनाउँछन्। यसले विद्यार्थीहरूको ध्यान केन्द्रित
गर्न मद्दत गर्दछ।
- सक्रिय संलग्नता: उपकरणहरूको प्रयोगले
विद्यार्थीहरूलाई सक्रिय रूपमा सिक्नमा प्रोत्साहित गर्दछ। यसले उनीहरूको
रुचि र संलग्नता बढाउँछ।
- विविधता: विभिन्न उपकरणहरूको प्रयोगले
शिक्षण विधिहरूमा विविधता ल्याउँछ। यसले विभिन्न प्रकारका विद्यार्थीहरूको
सिकाइ शैलीमा अनुकूलता प्रदान गर्दछ।
- समझ र सम्झना: दृश्य र श्रव्य उपकरणहरूले
जानकारीलाई सम्झनमा सजिलो बनाउँछन्। यसले विद्यार्थीहरूको समझमा सुधार
ल्याउँछ।
- सामाजिक र भावनात्मक
विकास: सहायक उपकरणहरूको
प्रयोगले समूहमा काम गर्ने र संवाद गर्ने क्षमतामा सुधार ल्याउँछ, जसले सामाजिक र भावनात्मक विकासमा
योगदान पुर्याउँछ।
2. कम मूल्य तथा विनामूल्य उपकरणहरूको
तयारी अनि प्रयोग
कम मूल्य र
विनामूल्य उपकरणहरूको तयारी र प्रयोगले शिक्षणमा लागत घटाउन र पहुँच बढाउन मद्दत
गर्दछ। यसमा निम्नलिखित उपायहरू समावेश छन्:
- DIY (Do It Yourself) उपकरणहरू: शिक्षकहरूले कागज, कार्डबोर्ड, र अन्य साधारण सामग्रीहरू प्रयोग
गरेर चार्ट, फ्लैश कार्ड, र अन्य दृश्य उपकरणहरू बनाउन
सक्छन्।
- अनलाइन स्रोतहरू: विभिन्न अनलाइन प्लेटफर्महरूमा
विनामूल्य शैक्षिक सामग्री र उपकरणहरू उपलब्ध छन्। जस्तै, शैक्षिक वेबसाइटहरू, युट्यूब च्यानलहरू, र ओपन-एक्सेस सामग्री।
- समुदायको सहयोग: स्थानीय समुदाय र अभिभावकहरूको
सहयोगले शिक्षण सामग्री र उपकरणहरूको तयारीमा मद्दत गर्न सक्छ। यसले
सामुदायिक संलग्नता र सहयोगलाई प्रोत्साहित गर्दछ।
3. दृश्य उपकरण – चार्ट, नक्सा, पाकेट
बोर्ड, फ्लैश कार्ड, ब्ल्याकबोर्ड
चार्ट:
चार्टहरूमा चित्र, ग्राफ, र
जानकारीको संक्षेपमा प्रस्तुत गरिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूको ध्यान आकर्षित गर्न र
जानकारीलाई स्पष्टता दिन मद्दत गर्दछ।
नक्सा:
भाषा शिक्षणमा नक्साहरूको
प्रयोगले भौगोलिक र सांस्कृतिक जानकारीलाई बुझ्नमा मद्दत गर्दछ। यसले
विद्यार्थीहरूको स्थानिक सोचमा सुधार ल्याउँछ।
पाकेट
बोर्ड:
पाकेट बोर्डमा विभिन्न
सामग्रीहरू जस्तै चित्र, शब्द,
र वाक्यहरू राख्न सकिन्छ।
यसले विद्यार्थीहरूलाई सामग्रीलाई सजिलैसँग देख्न र प्रयोग गर्न मद्दत गर्दछ।
फ्लैश
कार्ड:
फ्लैश कार्डहरूमा शब्द, चित्र, वा
जानकारीको संक्षेपमा प्रस्तुत गरिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूको शब्दावली र ज्ञानमा
वृद्धि गर्न मद्दत गर्दछ।
ब्ल्याकबोर्ड:
ब्ल्याकबोर्डमा शिक्षकले
जानकारी लेख्न र चित्र बनाउन सक्छन्। यसले विद्यार्थीहरूको ध्यान केन्द्रित गर्न र
सामूहिक रूपमा विचारहरू साझा गर्न मद्दत गर्दछ।
4. श्रव्यदृश्य उपकरण – सिडी, रेडियो, टेलिभिजन, प्रोजेक्टर, पावरप्वाइंट
प्रस्तुति
सिडी:
सिडीमा भाषा शिक्षणका लागि
विभिन्न शैक्षिक सामग्री र गतिविधिहरू समावेश गर्न सकिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूको
श्रवण कौशलमा सुधार ल्याउँछ।
रेडियो:
रेडियो कार्यक्रमहरूले
भाषा शिक्षणमा श्रवण कौशल र संवादको अभ्यासमा मद्दत गर्दछ। यसले विद्यार्थीहरूलाई
विभिन्न उच्चारण र बोलीहरूको बारेमा जानकारी दिन्छ।
टेलिभिजन:
टेलिभिजनमा शैक्षिक
कार्यक्रमहरू र चलचित्रहरूले भाषा शिक्षणमा दृश्य र श्रव्य सामग्रीको समावेश गर्न
मद्दत गर्दछ। यसले विद्यार्थीहरूको रुचि र संलग्नता बढाउँछ।
प्रोजेक्टर:
प्रोजेक्टरको प्रयोगले
ठूलो स्क्रिनमा सामग्री प्रस्तुत गर्न मद्दत गर्दछ। यसले समूहमा शिक्षण गर्दा
सामग्रीलाई स्पष्टता र प्रभावशीलता दिन्छ।
पावरप्वाइंट
प्रस्तुति:
पावरप्वाइंट प्रस्तुति
शिक्षणमा दृश्य सामग्री र जानकारीलाई व्यवस्थित र आकर्षक तरिकामा प्रस्तुत गर्न
मद्दत गर्दछ। यसले विद्यार्थीहरूको ध्यान केन्द्रित गर्न र जानकारीलाई सम्झनमा
सजिलो बनाउँछ।
निष्कर्ष
भाषा शिक्षणमा
सहायक उपकरणहरूको प्रयोगले शिक्षण प्रक्रिया र सिकाइलाई प्रभावकारी बनाउँछ। दृश्य
र श्रव्यदृश्य उपकरणहरूको प्रयोगले विद्यार्थीहरूको संलग्नता, समझ, र
सामाजिक विकासमा सुधार ल्याउँछ। कम मूल्य र विनामूल्य उपकरणहरूको तयारी र प्रयोगले
शिक्षणमा पहुँच र लागत घटाउन मद्दत गर्दछ। यसैले,
प्रभावकारी भाषा शिक्षणका
लागि विविध सहायक उपकरणहरूको समावेश आवश्यक छ।
UNIT 9
पाठ
परिकल्पना अनि पाठ योजना निर्माण
1. पाठ परिकल्पना: उद्देश्य, महत्व
अनि आवश्यकता
उद्देश्य:
पाठ परिकल्पना शिक्षण
प्रक्रिया र पाठ योजना निर्माणको आधार हो। यसले शिक्षकलाई पाठको उद्देश्य, सामग्री, र
विधिहरूलाई स्पष्ट रूपमा परिभाषित गर्न मद्दत गर्दछ।
- सामग्रीको चयन: पाठ परिकल्पनाले शिक्षकलाई
उपयुक्त सामग्री र गतिविधिहरू चयन गर्न मद्दत गर्दछ।
- सिकाइ लक्ष्य: यसले विद्यार्थीहरूको लागि स्पष्ट
सिकाइ लक्ष्य निर्धारण गर्न मद्दत गर्दछ।
महत्व:
पाठ परिकल्पना शिक्षणको
प्रभावशीलता र परिणाममा सुधार ल्याउन महत्त्वपूर्ण छ। यसले निम्नलिखित
महत्त्वपूर्ण पक्षहरूमा योगदान पुर्याउँछ:
- संगठन: पाठ परिकल्पनाले शिक्षणलाई
व्यवस्थित र संरचित बनाउँछ।
- सामाजिक र भावनात्मक
विकास: यसले विद्यार्थीहरूको
सामाजिक र भावनात्मक विकासमा ध्यान दिन्छ।
- समीक्षा र सुधार: पाठ परिकल्पनाले शिक्षणको
प्रभावकारिता मूल्यांकन गर्न र आवश्यक सुधार गर्न मद्दत गर्दछ।
आवश्यकता:
पाठ परिकल्पना आवश्यक छ
किनभने यसले शिक्षकलाई शिक्षण प्रक्रिया र विद्यार्थीहरूको सिकाइमा स्पष्टता र
दिशा दिन्छ। यसले शिक्षणको गुणस्तरमा सुधार ल्याउँछ र विद्यार्थीहरूको संलग्नता र
रुचिमा वृद्धि गर्दछ।
2. अणु तथा बृहत पाठ योजना तयानी अनि गठन
अभ्यास
अणु
पाठ योजना:
अणु पाठ योजना एक
संक्षिप्त योजना हो, जसमा पाठको मुख्य उद्देश्य, सामग्री, र
गतिविधिहरूको संक्षेपमा उल्लेख गरिन्छ। यसमा निम्नलिखित तत्वहरू समावेश हुन्छन्:
- पाठको शीर्षक: पाठको नाम।
- उद्देश्य: पाठको उद्देश्य र सिकाइ लक्ष्य।
- सामग्री: पाठमा प्रयोग गरिने सामग्री र
स्रोतहरू।
- गतिविधिहरू: पाठमा गरिने गतिविधिहरूको
संक्षेपमा विवरण।
बृहत
पाठ योजना:
बृहत पाठ योजना विस्तृत
योजना हो, जसमा पाठको सबै पक्षहरूको गहिराइमा चर्चा
गरिन्छ। यसमा निम्नलिखित तत्वहरू समावेश हुन्छन्:
- पाठको शीर्षक र विषय: पाठको नाम र विषयको विवरण।
- उद्देश्य र लक्ष्य: पाठको उद्देश्य र विद्यार्थीहरूको
लागि निर्धारित लक्ष्य।
- सामग्री र स्रोतहरू: पाठमा प्रयोग गरिने सामग्री, पुस्तकहरू, र अन्य स्रोतहरूको सूची।
- शिक्षण विधिहरू: पाठमा प्रयोग गरिने शिक्षण
विधिहरूको विवरण।
- गतिविधिहरू: विद्यार्थीहरूको संलग्नता र
अभ्यासका लागि गरिने गतिविधिहरूको विस्तृत विवरण।
- समय तालिका: पाठको लागि निर्धारित समय र
गतिविधिहरूको समय तालिका।
3. मूल्यांकनका लागि वर्कसीट तथा
प्रश्नपत्र निर्माण
वर्कसीट
निर्माण:
वर्कसीट विद्यार्थीहरूको
सिकाइको मूल्यांकन गर्नका लागि प्रयोग गरिन्छ। यसमा निम्नलिखित तत्वहरू समावेश
गर्न सकिन्छ:
- प्रश्नहरू: पाठसँग सम्बन्धित प्रश्नहरू, जसले विद्यार्थीहरूको समझ र
ज्ञानको मूल्यांकन गर्छ।
- गतिविधिहरू: विभिन्न गतिविधिहरू, जस्तै चित्र बनाउने, वाक्य निर्माण गर्ने, वा समूहमा चर्चा गर्ने।
- समीक्षा: विद्यार्थीहरूको उत्तर र
गतिविधिहरूको समीक्षा गर्नका लागि स्थान।
प्रश्नपत्र
निर्माण:
प्रश्नपत्र
विद्यार्थीहरूको ज्ञान र समझको मूल्यांकन गर्नका लागि प्रयोग गरिन्छ। यसमा
निम्नलिखित तत्वहरू समावेश गर्न सकिन्छ:
- प्रश्नहरूको प्रकार: बहुविकल्पीय प्रश्न, खुला प्रश्न, र संक्षिप्त उत्तर प्रश्न।
- विषयको विविधता: पाठको विभिन्न पक्षहरूमा आधारित
प्रश्नहरूको समावेश।
- समय सीमा: प्रश्नपत्रको लागि निर्धारित समय
सीमा।
4. क्रियाकलाप (Activity) आधारित मूल्यांकन
क्रियाकलाप आधारित
मूल्यांकनले विद्यार्थीहरूको सिकाइको मूल्यांकन गर्नका लागि विभिन्न गतिविधिहरूको
प्रयोग गर्दछ। यसमा निम्नलिखित तत्वहरू समावेश गर्न सकिन्छ:
- सक्रिय संलग्नता: विद्यार्थीहरूलाई विभिन्न
गतिविधिहरूमा संलग्न गराउने, जस्तै समूह चर्चा, खेल, र प्रोजेक्ट कार्य।
- सामाजिक र भावनात्मक
विकास: गतिविधिहरूले
विद्यार्थीहरूको सामाजिक र भावनात्मक विकासमा ध्यान दिन्छ।
- समीक्षा र फीडब्याक: गतिविधिहरूको आधारमा
विद्यार्थीहरूको प्रदर्शनको समीक्षा र फीडब्याक प्रदान गर्ने।
उदाहरण
गतिविधिहरू:
- समूह परियोजना: विद्यार्थीहरूलाई समूहमा काम गर्न
र कुनै विशेष विषयमा प्रोजेक्ट तयार गर्न प्रोत्साहित गर्ने।
- रोल प्ले: विद्यार्थीहरूलाई कुनै विशेष
परिदृश्यमा भूमिका निभाउन प्रोत्साहित गर्ने।
- प्रस्तुति: विद्यार्थीहरूलाई आफ्नो विचार र
ज्ञान प्रस्तुत गर्न प्रोत्साहित गर्ने।
निष्कर्ष
पाठ परिकल्पना र
पाठ योजना निर्माण शिक्षण प्रक्रियाको महत्वपूर्ण पक्ष हुन्। यसले शिक्षकलाई
स्पष्टता र दिशा दिन्छ, जसले विद्यार्थीहरूको सिकाइमा सुधार
ल्याउँछ। अणु र बृहत पाठ योजनाको निर्माण,
मूल्यांकनका लागि वर्कसीट
र प्रश्नपत्र निर्माण, र क्रियाकलाप आधारित मूल्यांकनले
शिक्षणको गुणस्तरमा वृद्धि गर्दछ। यसैले,
प्रभावकारी शिक्षणका लागि
यी सबै पक्षहरूको समावेश आवश्यक छ।
UNIT 10
मूल्यांकन
प्रणाली र उपकरणहरू
1. भाषा शिक्षणमा मूल्यांकनका सिद्धान्त र
विधिहरू
सिद्धान्तहरू:
- सामग्रीको मूल्यांकन: विद्यार्थीहरूको ज्ञान र समझको मूल्यांकन
गर्न सामग्रीको उपयुक्तता र प्रभावकारिता।
- सक्रिय संलग्नता: विद्यार्थीहरूको संलग्नता र
सक्रिय भागीदारीको मूल्यांकन।
- समग्र दृष्टिकोण: विद्यार्थीहरूको समग्र विकास र
प्रगतिको मूल्यांकन, जसमा शैक्षिक, सामाजिक, र भावनात्मक पक्षहरू समावेश छन्।
विधिहरू:
- फर्मेटिभ मूल्यांकन: शिक्षणको क्रममा विद्यार्थीहरूको
प्रगति र समझको निरन्तर मूल्यांकन। यसमा कक्षामा गरिएका गतिविधिहरू, गृहकार्य, र प्रोजेक्टहरू समावेश छन्।
- सम्मरटिभ मूल्यांकन: पाठ्यक्रमको अन्त्यमा
विद्यार्थीहरूको समग्र प्रदर्शनको मूल्यांकन। यसमा परीक्षा, प्रोजेक्ट, र अन्य मूल्यांकन विधिहरू समावेश
छन्।
2. साक्षात्कार, कथा, संवाद, गद्य/पद्य
पठनद्वारा मूल्यांकन
साक्षात्कार:
साक्षात्कारको माध्यमबाट
विद्यार्थीहरूको विचार, अनुभव,
र ज्ञानको मूल्यांकन गर्न
सकिन्छ। यसले विद्यार्थीहरूको सोच र संवाद कौशलको मूल्यांकनमा मद्दत गर्दछ।
कथा:
विद्यार्थीहरूले लेखेका
कथाहरूको मूल्यांकन गर्दा, उनीहरूको सृजनात्मकता, भाषा
प्रयोग, र विचारको स्पष्टता मूल्यांकन गर्न सकिन्छ।
यसले लेखन कौशलको विकासमा मद्दत गर्दछ।
संवाद:
संवादको माध्यमबाट
विद्यार्थीहरूको बोलाई र संवाद कौशलको मूल्यांकन गर्न सकिन्छ। यसले उनीहरूको
सामाजिक र भावनात्मक विकासमा योगदान पुर्याउँछ।
गद्य/पद्य
पठन:
गद्य र पद्य पठनको
मूल्यांकन गर्दा, विद्यार्थीहरूको पठन कौशल, उच्चारण, र
सामग्रीको समझको मूल्यांकन गर्न सकिन्छ। यसले उनीहरूको श्रवण र बोलाईमा सुधार
ल्याउँछ।
3. हिज्जे अनि उच्चारण आधारित मूल्यांकन
हिज्जे
मूल्यांकन:
हिज्जे मूल्यांकनमा
विद्यार्थीहरूको लेखनमा सही हिज्जेको प्रयोगको मूल्यांकन गरिन्छ। यसमा विभिन्न
शब्दहरूको लेखन र उच्चारणको अभ्यास गराइन्छ।
- उदाहरण: विद्यार्थीहरूलाई शब्दकोशको
प्रयोग गरेर शब्दहरूको सही हिज्जे लेख्न प्रोत्साहित गर्ने।
उच्चारण
मूल्यांकन:
उच्चारण मूल्यांकनमा
विद्यार्थीहरूको बोलाईमा सही उच्चारणको मूल्यांकन गरिन्छ। यसमा विभिन्न गतिविधिहरू, जस्तै
श्रवण र बोलाई अभ्यास समावेश छन्।
- उदाहरण: विद्यार्थीहरूलाई शब्दहरू र
वाक्यहरू उच्चारण गर्न प्रोत्साहित गर्ने र सही उच्चारणको मूल्यांकन गर्ने।
4. आन्तरिक तथा बाह्य मूल्यांकन
आन्तरिक
मूल्यांकन:
आन्तरिक मूल्यांकन शिक्षण
संस्थान भित्र गरिन्छ। यसमा शिक्षकहरूले विद्यार्थीहरूको प्रगति र प्रदर्शनको
मूल्यांकन गर्छन्। यसले विद्यार्थीहरूको दैनिक गतिविधिहरू, गृहकार्य, र
कक्षामा गरिएका गतिविधिहरूको मूल्यांकन समावेश गर्दछ।
बाह्य
मूल्यांकन:
बाह्य मूल्यांकन शिक्षण
संस्थान बाहिर गरिन्छ। यसमा परीक्षा,
प्रतियोगिता, र
अन्य बाह्य स्रोतहरूको माध्यमबाट विद्यार्थीहरूको मूल्यांकन गरिन्छ। यसले
विद्यार्थीहरूको समग्र प्रदर्शनको मूल्यांकनमा मद्दत गर्दछ।
5. प्रगति जाँच पत्र (Achievement Test) तयार गर्ने प्रक्रिया
प्रगति
जाँच पत्र तयार गर्ने प्रक्रिया:
- उद्देश्य निर्धारण: जाँच पत्रको उद्देश्य र मूल्यांकन
गर्न चाहिने ज्ञान र कौशलको स्पष्टता।
- सामग्री चयन: पाठ्यक्रमका अनुसार मूल्यांकन
गर्नुपर्ने सामग्रीको चयन।
- प्रश्नहरूको निर्माण: विभिन्न प्रकारका प्रश्नहरू
(बहुविकल्पीय, खुला, संक्षिप्त उत्तर) तयार गर्नु।
- समय सीमा निर्धारण: जाँच पत्रको लागि उपयुक्त समय
सीमा निर्धारण गर्नु।
- परीक्षण र समीक्षा: जाँच पत्रको परीक्षण र समीक्षा
गरेर आवश्यक सुधार गर्नु।
6. ब्लूप्रिन्ट, एकाई
जाँचपत्र अनि कक्षा आधारित प्रश्नपत्र निर्माण
ब्लूप्रिन्ट:
ब्लूप्रिन्टले मूल्यांकनको
संरचना र सामग्रीको योजना बनाउँछ। यसमा निम्नलिखित तत्वहरू समावेश हुन्छन्:
- विषयको सूची: मूल्यांकन गर्नुपर्ने विषयहरूको
सूची।
- प्रश्नहरूको प्रकार: विभिन्न प्रकारका प्रश्नहरूको
वितरण।
- समय र अंक वितरण: प्रत्येक प्रश्नको लागि समय र
अंकको वितरण।
एकाई
जाँचपत्र:
एकाई जाँचपत्रले
पाठ्यक्रमको एकाईको आधारमा मूल्यांकन गर्दछ। यसमा पाठ्यक्रमको विशेष एकाईको
सामग्री र उद्देश्यको आधारमा प्रश्नहरू समावेश गरिन्छ।
कक्षा
आधारित प्रश्नपत्र निर्माण:
कक्षा आधारित प्रश्नपत्रले
कक्षामा गरिएका गतिविधिहरू र पाठ्यक्रमको आधारमा प्रश्नहरू समावेश गर्दछ। यसमा
विद्यार्थीहरूको दैनिक गतिविधिहरू र प्रगतिको मूल्यांकन गर्नका लागि प्रश्नहरू
तयार गरिन्छ।
निष्कर्ष
भाषा शिक्षणमा
मूल्यांकन प्रणाली र उपकरणहरूको प्रयोगले विद्यार्थीहरूको सिकाइको मूल्यांकनमा
महत्त्वपूर्ण भूमिका खेल्दछ। मूल्यांकनका सिद्धान्त र विधिहरू, साक्षात्कार, कथा, संवाद, हिज्जे
र उच्चारण मूल्यांकन, आन्तरिक र बाह्य मूल्यांकन, प्रगति
जाँच पत्रको तयारी, र प्रश्नपत्र निर्माणले शिक्षणको गुणस्तरमा
सुधार ल्याउँछ। यसैले, प्रभावकारी मूल्यांकनका लागि यी सबै
पक्षहरूको समावेश आवश्यक छ।